रायपुर नकटी गांव विवाद: विधायक कॉलोनी के लिए चले बुलडोजर पर मचा भारी बवाल, सियासत तेज; जानिए पूरा मामला
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास स्थित माना इलाके का नकटी गांव इस समय प्रदेश की सियासत का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है। रायपुर नकटी गांव विवाद उस समय बेहद उग्र हो गया, जब जिला प्रशासन और पुलिस बल की भारी तैनाती के साथ तड़के सुबह गांव में ताबड़तोड़ बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की गई। प्रस्तावित ‘विधायक कॉलोनी’ (MLA Colony) के निर्माण के लिए की गई इस बड़ी बेदखली की कार्रवाई के बाद से ही पूरे इलाके में तनाव का माहौल है।

प्रशासनिक टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई के विरोध में ग्रामीणों और महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। मौके पर पुलिस के साथ तीखी झूमाझटकी और पथराव की घटनाएं भी सामने आई हैं। इस पूरे मामले को लेकर छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी दल भाजपा और विपक्ष कांग्रेस के बीच जुबानी जंग और राजनीतिक घमासान तेज हो चुका है।
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🏗️ क्यों भड़का रायपुर नकटी गांव विवाद? (क्या है मुख्य वजह)
इस पूरे विवाद की जड़ में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के लिए चिन्हित की गई जमीन है। प्रशासन का दावा है कि नकटी गांव की करीब 35 एकड़ सरकारी निस्तारी भूमि पर ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से अवैध कब्जा (अतिक्रमण) किया गया था। इसी सरकारी जमीन को खाली कराने के लिए प्रशासन सुबह करीब 4:00 बजे ही बिजली काटकर भारी फोर्स के साथ पहुंच गया और देखते ही देखते 80 से अधिक मकानों को जमींदोज कर दिया गया।
वहीं दूसरी ओर, ग्रामीणों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इस जमीन पर आशियाना बनाकर रह रहे थे। बरसात के इस मौसम में अचानक बिना पुख्ता वैकल्पिक व्यवस्था किए उनके घरों को तोड़ दिया गया, जिससे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं।
⚖️ वादों और हकीकत की जंग: ग्रामीणों में भारी नाराजगी
रायपुर नकटी गांव विवाद में सबसे ज्यादा गुस्सा स्थानीय जनप्रतिनिधियों के झूठे आश्वासनों को लेकर है। ग्रामीणों के अनुसार, कार्रवाई से महज दो दिन पहले ही क्षेत्र के वरिष्ठ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि बारिश के इस मौसम में कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। लेकिन अचानक हुई इस कार्रवाई ने सरकार के दावों की पोल खोल दी है।
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हालांकि, प्रशासन का दावा है कि विस्थापित किए जा रहे सभी परिवारों के पुनर्वास के लिए नया रायपुर की ईडब्ल्यूएस (EWS) कॉलोनी में मकान आवंटित किए जा रहे हैं और उनके सामान को भी सुरक्षित वहां भिजवाया जा रहा है। इसके बावजूद, कई परिवारों का आरोप है कि बड़े संयुक्त परिवारों को सिर्फ एक मकान दिया जा रहा है, जिससे वे बिना बिजली-पानी के रहने से इनकार कर रहे हैं।
📊 नकटी विवाद से जुड़े मुख्य बिंदु और आंकड़े
नीचे दी गई तालिका से आप समझ सकते हैं कि मैदानी स्तर पर इस समय क्या स्थिति बनी हुई है:
| विवरण / पक्ष (Details) | प्रशासनिक कार्रवाई एवं स्थिति (Current Status) |
| ध्वस्त किए गए मकानों की संख्या | 80 से अधिक पक्के और कच्चे मकान |
| प्रस्तावित सरकारी प्रोजेक्ट | छत्तीसगढ़ के विधायकों के लिए आलीशान ‘विधायक कॉलोनी’ |
| विपक्ष (कांग्रेस) का कदम | मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधायक कॉलोनी का स्थान बदलने की मांग |
| कानूनी कार्रवाई | अधिकारियों से धक्का-मुक्की और पथराव के आरोप में अज्ञात पर FIR दर्ज |
💡 उजागर न्यूज़ की राय: क्या गरीबों का आशियाना उजाड़ना सही है?
किसी भी विकास कार्य या सरकारी प्रोजेक्ट के लिए अतिक्रमण हटाना कानूनी रूप से सही हो सकता है, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण से भारी बारिश के मौसम में सैकड़ों लोगों को बेघर कर देना कहीं से भी जनहित में प्रतीत नहीं होता। सरकार को चाहिए कि इस संवेदनशील मामले में राजनीति करने के बजाय सबसे पहले विस्थापितों को मूलभूत सुविधाएं और सही मुआवजा उपलब्ध कराए।
भाइयों, क्या विधायकों के आलीशान घरों के लिए गरीब ग्रामीणों के आशियाने पर बुलडोजर चलाना सही फैसला है? इस पूरे रायपुर नकटी गांव विवाद पर आपका क्या सोचना है, हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। छत्तीसगढ़ की राजनीति और मैदानी हकीकत से जुड़ी हर कड़क न्यूज़ के लिए हमारी वेबसाइट उजागर न्यूज़ (Internal Link) को फॉलो करना न भूलें। इस मामले से जुड़ी अन्य मीडिया रिपोर्ट्स और ग्राउंड कवरेज को देखने के लिए आप छत्तीसगढ़ के विश्वसनीय न्यूज़ नेटवर्क IBC24 की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जा सकते हैं। इस पोस्ट को अपने वाट्सएप ग्रुप्स में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें!
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इस ग्राउंड रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई से जुड़ा लाइव वीडियो देखने के लिए आप IBC24 न्यूज़ चैनल के इस बुलेटिन को देख सकते हैं, जिसमें नकटी गांव में हुई धक्का-मुक्की और बुलडोजर एक्शन को साफ तौर पर दिखाया गया है
